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था इक वक़्त कि सचमुच तेरे क़ाबिल था मैं 

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हासिल करके तुझ को अब शर्मिंदा सा हूँ था इक वक़्त कि सचमुच तेरे क़ाबिल था मैं  क

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हासिल करके तुझ को अब शर्मिंदा सा हूँ
था इक वक़्त कि सचमुच तेरे क़ाबिल था मैं 

कौन था वो जिसने ये हाल किया है मेरा 
किस को इतनी आसानी से हासिल था मैं 

रात थी जब तुम्हारा शहर आया
फिर भी खिड़की तो मैं ने खौल ही ली

~ शारिक़ कैफ़ी✍️

@KaifiShariq
#shayari https://t.co/DlGRPJTY9c
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Source by @काव्य_रस

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