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ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया, हर इल
-कबूल-क्या-करलीं-सजाएँ-मैंने-ज़माने-ने-दस्तूर-ही

हँसकर कबूल क्या करलीं, सजाएँ मैंने…….!! ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया, हर इल

हँसकर कबूल क्या करलीं, सजाएँ मैंने…….!!

ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया, हर इलज़ाम मुझ पर लगाने का ……!!

Wo ishq hi kya jis mein hisaab ho

Mohabbat to himesha be-hisaab hoti hai

Irada Shayari | Izhaar Shayari | Izzat Shayari in hindi
John Elia

https://t.co/3rDYgwNB2f https://t.co/NQ4n5VZR8O
हँसकर कबूल क्या करलीं, सजाएँ मैंने…….!!

ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया, हर इल

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