सुकून मिलता है दो लब्ज़ कागज पे उतार के, चीख भी लेता हूं और आवाज भी नही होती…

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सुकून मिलता है दो लब्ज़ कागज पे उतार के,
चीख भी लेता हूं और आवाज भी नही होती…
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Source by ⟆հαψαʀι Ηυβ

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