बंद कमरे में चार दीवारें और छत के सहारे पड़ा हूँ, तुम ख़याल -ए- मेहसूस औऱ मैं तस

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बंद कमरे में चार दीवारें और छत के सहारे पड़ा हूँ,
तुम ख़याल -ए- मेहसूस औऱ मैं तस्वीर हो पड़ा हूँ … !!

– दिशान्त लफ्ज़
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Source by Dishant Kumar Pal