जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं हसरते कब उठी

जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है
कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं
हसरते कब उठी, कब शांत हो गयी
ज़िन्दगी गुल से, कब बेजान हो गयी
ऐसा नहीं की, खिलने की चाह नहीं, पर
कुछ तो है जो अंदर से टूट रहा हैं
जीने की चाहत में, जीवन छूट रहा है

~ मोहिनी

#zindagi #chahat #shayari #sad
जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है
कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं
हसरते कब उठी

जीने की चाह में, जीवन छूट रहा है
कुछ तो हैं, जो अंदर से टूट रहा हैं
हसरते कब उठी, कब शांत हो गयी
ज़िन्दगी गुल से, कब बेजान हो गयी
ऐसा नहीं की, खिलने की चाह नहीं, पर
कुछ तो है जो अंदर से टूट रहा हैं
जीने की चाहत में, जीवन छूट रहा है

~ मोहिनी

#zindagi #chahat #shayari #sad
#जन #क #चह #म #जवन #छट #रह #हकछ #त #ह #ज #अदर #स #टट #रह #हहसरत #कब #उठ

Twitter shayarish by Hindi Shayari

Leave a Reply