जब खुली आंखों से मुर्शद के दीदार होते है। तब नींद में भी आंखें रुकसत करने का जी

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जब खुली आंखों से मुर्शद के दीदार होते है।
तब नींद में भी आंखें रुकसत करने का जी नही चाहता।
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Source by स्वप्निल सोनकर

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