खुद को इतना भी न बचाया करो, बारिशें जब हों तो भीग जाया करो। धूप रोज मायूस होकर ल

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खुद को इतना भी न बचाया करो,
बारिशें जब हों तो भीग जाया करो।
धूप रोज मायूस होकर लौट जाती है,
कभी तो किसी बहाने छत पर आया करो।
#बज्म
#Shayari
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Source by Baaghi®️

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