ख़त जो लिखा मैनें इंसानियत के पते पर, डाकिया ही चल बसा शहर ढूंढ़ते ढूंढ़ते। #

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ख़त जो लिखा मैनें इंसानियत के पते पर,

डाकिया ही चल बसा शहर ढूंढ़ते ढूंढ़ते।

#quote #Humanity @shayari @mypoetrysms
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Source by Amardeep S Reen

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