क़ानून को फिर इक तेज़ तमाचा मारा गया शहर में चर्चा थी , जबरन लिबास उतारा गया

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क़ानून को फिर इक तेज़ तमाचा मारा गया
शहर में चर्चा थी , जबरन लिबास उतारा गया ।

हलक सूखा जब , ली पनाह तेरे दर की
क़िस्मत ख़राब थी , जो बहरों पुकारा गया !

✍By :-#Surya_rawat4
#Shayari #शायरी
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Source by SURYA RAWAT

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