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कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये।
#sha
कहाँ-तो-तय-था-चराग़ाँ-हर-एक-घर-के-लिये

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये, कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये। #sha

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कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये,
कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये।
#shayari
#PriSatyam https://t.co/c2fFDOzQnx
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Source by Satyam Kumar

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