कलम से इन रिवायतों की जद से बाहर आऊं कैसे, अपनों को खफा कर तुझे अपना बनाऊं कैसे

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कलम से ✍️
इन रिवायतों की जद से बाहर आऊं कैसे,
अपनों को खफा कर तुझे अपना बनाऊं कैसे?

मेरी वफ़ा की सज़ा इस क़दर न दे मुझको,
तू ही बता इस आग के दरिया में उतर जाऊं, कैसे?
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Source by शाश्वत राय ‘ विभोर ‘

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