कभी यूँ भी हो कि बाज़ी पलट जाये सारी, उसे याद सताये मेरी और मैं शुकुन से सो जाऊँ

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कभी यूँ भी हो कि बाज़ी पलट जाये सारी,
उसे याद सताये मेरी और मैं शुकुन से सो जाऊँ।
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Source by ⟆հαψαʀι Ηυβ

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