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अश्कों को पी लिया ग़मे-दौराँ को खा लिया
साक़
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इस तौर अपनी ज़िन्दगी हमने गुज़ार दी अश्कों को पी लिया ग़मे-दौराँ को खा लिया साक़

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इस तौर अपनी ज़िन्दगी हमने गुज़ार दी
अश्कों को पी लिया ग़मे-दौराँ को खा लिया
साक़ी के इन्तज़ार मे बैठे न रह सके
हमने ख़ुद उठ के हाथ में सागर उठा लिया
“Gule-Sarshar” by “Ved Prakash Malik ‘Sarshar’ ”

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