अपनी पीठ से निकले ख़ंजर को जब गिना मैंने , ठीक उतने ही निकले , जितनों को गले लगा

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अपनी पीठ से निकले ख़ंजर को जब गिना मैंने ,
ठीक उतने ही निकले , जितनों को गले लगाया था।
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Source by Anjuman Shayari