कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj विस्मृति-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj वहाँ एक फूल खिला हुआ है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj रास्ते की मुश्किल-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj …

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विस्मृति-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

विस्मृति-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   (पिता के लिए) एक दिन गड्डमड्ड होने लगती हैं चीज़ें, क्रियाएँ, नाम, चेहरे और सुपरिचितताएँ फिर तुम स्मृति का पीछा करते हो जैसे बचपन की उस नदी का जो अब निचुड़ गई है और हाँफते हुए समझने की कोशिश करते हो कि …

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वहाँ एक फूल खिला हुआ है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

वहाँ एक फूल खिला हुआ है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   वहाँ एक फूल खिला हुआ है अकेला कोई उसे छू भी नहीं रहा है किसी सुबह शाम में वह झर जाएगा लेकिन देखो, वह खिला हुआ है शताब्दियों से बारिश, मिट्टी और यातनाओं को जज्ब करते हुए …

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रास्ते की मुश्किल-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

रास्ते की मुश्किल-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   आप मेज को मेज तरह और घास को घास की तरह देखते हैं इस दुनिया में से निकल जाना चाहते हैं चमचमाते तीर की तरह तो मुश्किल यहाँ से शुरू होती है कि फिर भी आप होना चाहते हैं कवि …

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यह राख है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

यह राख है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   इसका रंग राख का रंग है इसका वजन राख का वजन है जब सारी गंध उड़ जाती हैं तो राख की गंध बची रहती है इसे मुट्‍ठी में भरो यह एक देह है इसे छोड़ो, यह धीरे-धीरे झरेगी और हथेली …

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यह ज़्यादा बहुत ज़्यादा है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

यह ज़्यादा बहुत ज़्यादा है-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   कुछ लोगों के पास हर चीज़ ज़रूरत से बहुत ज़्यादा है वे लोग ही जगह-जगह दिखते हैं बार-बार उनमें बार-बार दिखने की सामर्थ्य ज़्यादा है वे लोग दिन-रात बने रहते हैं अख़बारों में, टेलिविजन में, हमारी बातचीत में, …

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यदि तुम नहीं माँगोगे न्याय-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

यदि तुम नहीं माँगोगे न्याय-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   यह विषयों का अकाल नहीं है यह उन बुनियादी चीज़ों के बारे में है जिन्हें थककर या खीझकर रद्दी की टोकरी में नहीं डाला जा सकता जैसे कि न्याय — जो बार-बार माँगने से ही मिल पाता है …

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मृत्युलोक और कुछ पंक्तियॉं-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

मृत्युलोक और कुछ पंक्तियॉं-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   इसी संसार की भीड़ में दिखा वह एक चेहरा, जिसे भूला नहीं जा सकता। तमाम मुखौटों के बीच सचमुच का चेहरा। या हो सकता है कि वह इतने चेहरों के बीच एक शानदार मुखौटा रहा हो। उस चेहरे पर …

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मृतकों की याद-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

मृतकों की याद-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   क्षमा करें, यहाँ इस बैठक में मैं कुछ नहीं कह पाऊँगा मृतकों को याद करने के मेरे पास कुछ दूसरे तरीके हैं यों भी साँवला पत्थर, बारिश, रेस्तराँ की टेबुल, आलिंगन, संगीत का टुकड़ा, साँझ की गुफ़ा और एक मुस्कराहट …

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मध्यवर्गीय विजयवर्गीय-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

मध्यवर्गीय विजयवर्गीय-कविताएं_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj   उनका सपना यही था कि तनख़्वाह से चला लूँगा घर-बार कभी सुन लूँगा संगीत, घूमूँगा-फिरूँगा, मिलूँगा-जुलूँगा सबसे लेकिन नामाकूल पैकेज देकर चलवाए जा रहे हैं उनसे तमाम बैंक, शो-रूम, मॉल, सुपर बाज़ार जहाँ बजता ही रहता है वह लोकप्रिय संगीत जो …

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