श्रीकृष्ण-जयन्ती-कानन कुसुम-जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

श्रीकृष्ण-जयन्ती-कानन कुसुम-जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad कंस-हृदय की दुश्चिन्ता-सा जगत् में अन्धकार है व्याप्त, घोर वन है उठा भीग रहा है नीरद अमने नीर से मन्थर गति है उनकी कैसी व्याम में रूके हुए थे, ‘कृष्ण-वर्ण’ को देख लें- जो कि शीघ्र ही लज्जित कर देगा उन्हें जगत् आन्तरिक …

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