विहान-अंतर्यात्रा-परंतप मिश्र-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Parantap Mishra

विहान-अंतर्यात्रा-परंतप मिश्र-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Parantap Mishra   सुदूर क्षितिज के पास जहाँ उन्नत आकाश झुक कर विस्तृत धरती का आँचल स्पर्श करता है पूर्व दिशा से निकला सूर्य अब पश्चिम दिशा में श्रमशान्त होगा दिनभर की यात्रा पूर्ण कर अपनी किरणों की लालिमा से समस्त जगत को आनंदित करता हुआ …

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