राग सोरठि-पद -कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

राग सोरठि-पद -कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji हरि को नाम न लेइ गँवारा, क्या सोंचे बारंबारा॥टेक॥ पंच चोर गढ़ मंझा, गड़ लूटै दिवस रे संझा॥ जौ गढ़पति मुहकम होई, तौ लूटि न सकै कोई॥ अँधियारै दीपक चहिए, तब बस्त अगोचर लहिये॥ जब बस्त अगोचर पाई, तब दीपक रह्या …

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