राग बिहाग-प्रेममालिका -भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

राग बिहाग-प्रेममालिका -भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra हम तो श्री वल्लभ ही को जानैं हम तो श्री वल्लभ ही को जानैं। सेवत वल्लभ-पद-पंकज को, वल्लभ ही को ध्यानैं। हमरे मात-पिता गुरु वल्लभ, और नहीं उर आनैं। ‘हरीचंद’ वल्लभ-पद-बल सों, इन्द्रहु को नहिं मानैं॥ अहो प्रभु अपनी ओर निहारौ अहो प्रभु अपनी ओर …

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राग बिहाग-प्रेममालिका -भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

राग बिहाग-प्रेममालिका -भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra अहो हरि वेहू दिन कब ऐहैं अहो हरि वेहू दिन कब ऐहैं । जा दिन में तजि और संग सब हम ब्रज-बास बसैहैं ।। संग करत नित हरि-भक्तन को हम नेकहु न अघैहैं । सुनत श्रवण हरि-कथा सुधारस महामत्त हवै जैहैं ।। कब इन दोउ …

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