मिल गए पर हिजाब बाक़ी है-इंशा अल्ला खाँ ‘इंशा’ -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Insha Allah Khan Insha

मिल गए पर हिजाब बाक़ी है-इंशा अल्ला खाँ ‘इंशा’ -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Insha Allah Khan Insha मिल गए पर हिजाब बाक़ी है फ़िक्र-ए-नाज़-ओ-इताब बाक़ी है बात सब ठीक-ठाक है प अभी कुछ सवाल-ओ-जवाब बाक़ी है गरचे माजून खा चुके लेकिन दौर-ए-जाम-ए-शराब बाक़ी है झूटे वादे से उन के याँ अब …

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