मत ठहरो-श्रीकृष्ण सरल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shri Krishna Saral 

मत ठहरो-श्रीकृष्ण सरल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shri Krishna Saral मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है चलने के प्रण से तुम्हें नहीं टलना है मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है। केवल गति ही जीवन विश्रान्ति पतन है, तुम ठहरे, तो समझो ठहरा जीवन है। जब चलने का व्रत लिया ठहरना कैसा? अपने …

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