मौज़ू-ए-सुख़न-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

मौज़ू-ए-सुख़न-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz गुल हुई जाती है अफ़्सुर्दा सुलगती हुई शाम धुल के निकलेगी अभी चश्मा-ए महताब से रात और मुश्ताक़ निगाहों से सुनी जाएगी और उन हाथों से मस होंगे यह तरसे हुए हाथ उनका आँचल है कि रूख़सार कि पैराहन है कुछ …

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