ग़म के सागर में बैठकर हंसी न दो-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

ग़म के सागर में बैठकर हंसी न दो-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh   ग़म के सागर में बैठकर हंसी न दो। दिल को तोड़ा है तो दिल्लगी न दो।। अपनी आंखों से रुसवा करने वाले, मेरी आंखों को झूठी तसल्ली न दो।। ये तो कहता नहीं मर जाऊंगा …

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