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आवा‌‌ज़ दे मुझको मोहब्बत से | Munawwar Rana Ki Shayari | Jashn-e-Rekhta



मैं दुश्मन ही सही आवाज़ दे मुझको मोहब्बत से सलीक़े से बिठा कर देख हड्डी बैठ जाती है ~ मुनव्वर राना DON’T MISS ANY OF …

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