Rahat Indori Shayari मैं आख़िर कौन सा मौसम

Rahat Indori Shayari मैं आख़िर कौन सा मौसम

मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी

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