You are currently viewing वो नहीं मेरा मगर उससे मोहब्बत हैं तो हैं
वो-नहीं-मेरा-मगर-उससे-मोहब्बत-हैं-तो-हैं

वो नहीं मेरा मगर उससे मोहब्बत हैं तो हैं

[ad_1]

वो नहीं मेरा मगर उससे मोहब्बत हैं तो हैं, ये अगर रस्मों-रिवाजों से बगावत हैं तो हैं.. सच को मैंने सच कहा, जब कह दिया तो कह दिया अब ज़माने की नजर में ये हिमाकत हैं तो हैं…. ये तो सिर्फ इस गजल की चंद पंक्तियां हैं पूरी गजल को पढ़ने के लिए अभी क्लिक कीजिए rangmanchbharat.i… पर। अगर आप भी कविता, नज्म, मुक्तक, गजल, शायरी लिखना पसंद करते हैं तो आप चाहें तो अपनी रचना को हमारी वेबसाइट पर छपवा सकते हैं आप अपनी रचनाएं हमारी ईमेल आईडी

वो नहीं मेरा मगर उससे मोहब्बत हैं तो हैं
वो नहीं मेरा मगर उससे मोहब्बत हैं तो हैं, ये अगर रस्मों-रिवाजों से बगावत हैं तो हैं.. सच को मैंने सच कहा, जब कह दिया तो कह दिया अब ज़माने की नजर में ये हिमाकत हैं तो हैं…. ये तो सिर्फ इस गजल की चंद पंक्तियां हैं पूरी गजल को पढ़ने के लिए अभी क्लिक कीजिए rangmanchbharat.i… पर। अगर आप भी कविता, नज्म, मुक्तक, गजल, शायरी लिखना पसंद करते हैं तो आप चाहें तो अपनी रचना को हमारी वेबसाइट पर छपवा सकते हैं आप अपनी रचनाएं हमारी ईमेल आईडी

More pinterest shayari by rangmanchbharat

Leave a Reply