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राजेश रेड्डी – ग़ज़ल

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image shayari for अब क्या बताएँ टूटे हैं कितने कहाँ से हम ख़ुद को समेटते हैं यहाँ से वहाँ से हम ग़ाएब हुए हैं जब से …

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Source by choudhurypuja87

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