विश्व हिन्दी सम्मेलन- अटल बिहारी वाजपेयी

पोर्ट लुई के घाट पर,
नवपंडों की भीर;
रोली, अक्षत, नारियल,
सुरसरिता का नीर;
सुरसरिता का नीर,
लगा चन्दन का घिस्सा;
भैया जी ने औरों
का भी हड़पा, हिस्सा;
कह कैदी कविराय,
जयतु जय शिवसागर जी;
जय भगवती जागरण,
निरावरण जय नागर जी ।

कैदी कविराय की कुण्डलियाँ अटल बिहारी वाजपेयी |Kaidi Kavirai Ki Kundliyan Atal Bihari Vajpeyi

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