वह सिपाही थे न सौदागर थे न मजदूर थे-अदम गोंडवी

वह सिपाही थे न सौदागर थे न मजदूर थे-अदम गोंडवी

वह सिपाही थे न सौदागर थे न मजदूर थे
दरअसल मुंशी जी अपने दौर के मंसूर थे

अपने अफसानों में औसत आदमी को दी जगह
जब अलिफलैला के किस्से ही यहाँ मशहूर थे

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