मेरे पथ के बोधि दीप- अजय शोभने

मेरे पथ के बोधि दीप | (प्रकृति का उच्चतम ज्ञान)

मेरे पथ के बोधि दीप, तू अंधकार हर, प्रकाश कर। 

अखंड और अविरल जल, मेरा पगपग विकास कर। मेरा …   

तेरे प्रकाश में सत्य और अहिंसा के पथ-चलूँ,

खुद दीपक बनकर, औरों को प्रकाशित करूँ।

परोपकारी-जीवन जियूं और सदा होश में रहूँ,

वासना के वशीभूत हो, कभी न अपचारी बनूँ।

मेरे-पथ के बोधि दीप, तू अंधकार हर, प्रकाश कर।

अखंड और अविरल जल, मेरा पगपग विकास कर। मेरा …

प्रकृति के प्रकोप आयें, तो तू मुझे परिपक्व कर,

लाभ-हानि, जन्म-मरण, निंदा-स्तुति में स्थिर रहूं।

काम-क्रोध-लोभ-मोह-अहंकार के बंधन में न बंधूं,

विचलित न होंऊं कभी, निजधम्म पर आरूढ़ रहूं।

मेरे-पथ के बोधि दीप, तू अंधकार हर, प्रकाश कर।

अखंड और अविरल जल, मेरा पगपग विकास कर। मेरा …

ओ! बोधि दीप तेरे समीप, सभी को ज्योति मिले,

धम्म के तेरे प्रताप से, हर पथिक का चेहरा खिले।

तेरे संघ की शरण में, आत्मज्ञान को संबल मिले,

भय-मुक्त हों सभी, सभी का निर्वाण प्रसस्त कर।

मेरे-पथ के बोधि दीप, तू अंधकार हर, प्रकाश कर।

अखंड और अविरल जल, मेरा पगपग विकास कर। मेरा …

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