मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे- अदम गोंडवी

धरती की सतह पर अदम गोंडवी
Dharti Ki Satah Par Adam Gondvi

मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे

मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे ।
हम अपने इस कालखण्ड का एक नया इतिहास लिखेंगे ।

सदियों से जो रहे उपेक्षित श्रीमन्तों के हरम सजाकर,
उन दलितों की करुण कहानी मुद्रा से रैदास लिखेंगे ।

प्रेमचन्द की रचनाओं को एक सिरे से खारिज़ करके,

ये ‘ओशो’ के अनुयायी हैं, कामसूत्र पर भाष लिखेंगे ।

एक अलग ही छवि बनती है परम्परा भंजक होने से,
तुलसी इनके लिए विधर्मी, देरिदा को ख़ास लिखेंगे ।

इनके कुत्सित सम्बन्धों से पाठक का क्या लेना-देना,
लेकिन ये तो अड़े हैं ज़िद पे अपना भोग-विलास लिखेंगे ।

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये- अदम गोंडवी

गर चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे – अदम गोंडवी

मैं चमारों की गली में ले चलूंगा आपको-अदम गोंडवी

पूछते रहते हैं मुझसे लोग अकसर यह सवाल-अदम गोंडवी

Samay Se Muthbhed Adam Gondvi | समय से मुठभेड़ अदम गोंडवी

बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को-अदम गोंडवी

ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में-अदम गोंडवी

वह सिपाही थे न सौदागर थे न मजदूर थे-अदम गोंडवी

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