मातृपूजा प्रतिबंधित- अटल बिहारी वाजपेयी

पुष्प कंटकों में खिलते हैं,
दीप अंधेरों में जलते हैं ।
आज नहीं , प्रह्लाद युगों से,
पीड़ाओं में ही पलते हैं ।

किन्तु यातनाओं के बल पर,
नहीं भावनाएँ रूकती हैं ।
चिता होलिका की जलती है,
अन्यायी कर ही मलते हैं ।

मेरी इक्यावन कविताएँ अटल बिहारी वाजपेयी | Meri Ekyavan Kavitayen Atal Bihari Vajpeyi | अनुभूति के स्वर

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