पद ने जकड़ा- अटल बिहारी वाजपेयी

पहले पहरेदार थे,
अब भी पहरेदार;
तब थे तेवर तानते,
अब झुकते हर बार;
अब झुकते हर बार,
वक्त की है बलिहारी;
नजर चढ़ाने वालों ने ही,
नजर उतारी;
कह कैदी कविराय,
पुनः बंधन ने जकड़ा;
पहले मद ने और आजकल,
पद ने जकड़ा.

कैदी कविराय की कुण्डलियाँ अटल बिहारी वाजपेयी |Kaidi Kavirai Ki Kundliyan Atal Bihari Vajpeyi