तुम्हें कुदरत ने इंसान बनाया (इंसानियत का मार्ग)- अजय शोभने

तुम्हें कुदरत ने इंसान बनाया (इंसानियत का मार्ग)- अजय शोभने

तुम्हें कुदरत ने इंसान बनाया, इंसान ही तुमको बनना है,

राह कठिन है सच्चाई की, और तुमको उस पर चलना है।

सहनशीलता बनी रहे जीवन में, ईर्ष्या का न भाव रहे,

हमें मिला है, मिले सभी को, हृदय में ऐसी चाह रहे।

कष्टकंटकों में हो कोई, तो तुम को हमदर्दी रखना है,

अहं भाव तज सुने सभी की और सहायक बनना है।

तुम्हें कुदरत ने इंसान बनाया, इंसान ही तुमको बनना है,

राह कठिन है सच्चाई की, और तुमको उस पर चलना है।

जैसी कथनी वैसी करनी की स्पष्टता से पहचान रहे,

मिथ्या भाषी, ठग विद्या का, जीवन में न स्थान रहे।

कठिनाइयों का करें सामना, उनसे कभी न डरना है,

जियो और जीने दो की राह चुनें, हिंसा भाव को तजना है।

तुम्हें कुदरत ने इंसान बनाया, इंसान ही तुमको बनना है,

राह कठिन है सच्चाई की, और तुमको उस पर चलना है।

सलाह किसी को दो तो, उसके हित का भाव रखें,

भरोसेमंद रहो इतना कि, तुम पर सब विश्वास करें।

सलाह किसी की लो, पर ध्यान के साथ चलना है, 

चाल चलन हो सूरज सा और सूरज सा ही ढलना है।

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