जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें- धरती की सतह पर अदम गोंडवी

जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें ।
सतही जज़्बे को मुनासिब नहीं है प्यार कहें ।

बारहा फ़र्द की अज़्मत ने जिसे मोड़ दिया,
हम भला कैसे उसे वक़्त की रफ़्तार कहें ।

जलते इन्सान की बदबू से हवा बोझल है,
फिर भी इसरार है मौसम को ख़ुशगवार कहें ।

आर्मस्ट्राँग तो कहता है चाँद पत्थर है,
दौरे-हाज़िर में किसे हुस्न का मेयार कहें ।

(बारहा=अक्सर,प्राय:, फ़र्द=व्यक्ति,एक आदमी,
अज़्मत=श्रेष्ठता,महानता, इसरार=हठ,आग्रह,
दौरे-हाज़िर=वर्तमान समय में, मेयार=मापदण्ड)

धरती की सतह पर अदम गोंडवी | Dharti Ki Satah Par Adam Gondvi

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