घर-आंगन में दीप जलाकर -हिन्दी कविता प्रो. अजहर हाशमी

घर-आंगन में दीप जलाकर,
रचती है रांगोली बिटिया।

शुभ-मंगल की ‘मौली’ बिटिया,
हल्दी-कुमकुम – रौली बिटिया ।
ईद, दीवाली, क्रिसमस जैसी,
हंसी-खुशी की झोली बिटिया ।
सखी सहेली से घुल-मिलकर,
करती ऑख-मिचौली बिटिया
घर – आंगन में दीप जलाकर,
रचती है रांगोली बिटिया ।

मन ही मन बांते करती है,
सीधी-सादी भोली बिटिया ।
‘नहीं भ्रूण-हत्या हो मेरी’
‘मुझे बचाओ’ बोली बिटिया ।

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