गायब है गोरैया – हिन्दी कविता प्रो. अजहर हाशमी

चेतन-चिंतन ‘चह-चह’ का लेकर आती थी,
कुदरती घड़ी की ‘घंटी सदृश’ जगाती थी,
खिड़की से, कभी झरोखे से घुसकर घर में,
भैरवी जागरण की जो सुबह सुनाती थी,
गायब है गोरैया, खोजें, फिर घर लाएं ।
रुठी है तो मनुहार करें, हम समझाएं ।

गोरैया की चह-चह में मोहक गीत छिपा,
मीठा-मीठा सा राग छिपा, मनमीत छिपा,
कुदरती गायिका गोरैया की लय में तो,
ऐसा लगता जैसे सूफी-संगीत छिपा,
गोरैया के प्रति प्रेम-समपर्ण दिखलाएं ।
रूठी है तो मनुहार करें, हम समझाएं ।

गोरैया है चिड़िया, किंतु संदेश भी है,
गोरैया उल्लास, उमंग, उन्मेष भी है,
‘तिनका-तिनका गूथों तो घर बन जाएगा’,
गोरैया कोशिश का नीति-निर्देश भी है,
घर आने का उसको न्यौता देकर आएं।
रुठी है तो मनुहार करें हम समझाएं ।

Leave a Reply