नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ ॥
नागां मिरगां मछीआं रसीआं घरि धनु होइ ॥१॥
मः १ ॥
नानक सावणि जे वसै चहु वेछोड़ा होइ ॥
गाई पुता निरधना पंथी चाकरु होइ ॥२॥(1279)॥