नानक इहु जीउ मछुली झीवरु त्रिसना कालु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

नानक इहु जीउ मछुली झीवरु त्रिसना कालु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

नानक इहु जीउ मछुली झीवरु त्रिसना कालु ॥
मनूआ अंधु न चेतई पड़ै अचिंता जालु ॥
नानक चितु अचेतु है चिंता बधा जाइ ॥
नदरि करे जे आपणी ता आपे लए मिलाइ ॥२॥(955)॥