ये आँखे देख कर हम सारी दुनियाँ …


#य #आख #दख #कर #हम #सर #दनय
ये आँखे देख कर हम सारी दुनियाँ …

ये आँखे देख कर हम सारी दुनियाँ भूल जाते हैं इन्हे पाने की धून में हर तमन्ना भूल जाते हैं तुम अपनी महकी महकी जुल्फ के पेचों को कम कर दो मुसाफिर इन में घिरकर अपना रस्ता भूल जाते हैं ये बाहें जब हमें अपनी, पनाहों में बुलाती हैं हमें अपनी कसम हम हर सहारा भूल जाते हैं तुम्हारे नर्म-ओ-नाज़ूक होंठ जिस दम मुस्कुराते हैं बहारे झेपती हैं, फूल खिलना भूल जाते हैं बहोत कुछ तुम से कहने की, तमन्ना दिल में रखते हैं मगर जब सामने आते हैं, कहना भूल जाते हैं

ये आँखे देख कर हम सारी दुनियाँ …
#य #आख #दख #कर #हम #सर #दनय

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