@ymonika357 हाथों से फिसलती मिट्टी का मिलते और बिछड़ते रिश्तों का खोने और पाने…

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@ymonika357 हाथों से फिसलती मिट्टी का
मिलते और बिछड़ते रिश्तों का
खोने और पाने के चक्र का
कोई तो रिश्ता होगा ना

अपने अंदर की उदासी का
क्या शर्बत और क्या साकी का
क्या खादी और क्या खाकी का
क्या नाराज़गी और क्या राज़ी का
कोई तो रिश्ता होगा ना ।।
#बज़्म
#हिंदी_शब्द
#शायरांश
#शायरी
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Source by Shukla ji ( self written poems nd 2 liners)

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