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मुलाहिज़ा
दर्द को दर्द लिखूँ तो कलम रोता है
दोस्तों का…
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@Kuttu_01 ला जबाब शायरी मुलाहिज़ा दर्द को दर्द लिखूँ तो कलम रोता है दोस्तों का…

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@Kuttu_01 ला जबाब शायरी 🌹 👌
मुलाहिज़ा
दर्द को दर्द लिखूँ तो कलम रोता है
दोस्तों का #चेहरा गम में देखा भी नहीं जाता
मै ताशिरे कलम हूँ खुश देखना चाहिता हूँ
#बफा_की_राह_पर
#बज़्म
#शायरांश https://t.co/kfbdMSUgxC
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Source by muwahid ali khan .