हम जितना आगे की ओर बढ़ते है उतना ही पीछे भँवर में फंसते चले जाते है, एक शायर अपन…

हम जितना आगे की ओर बढ़ते है उतना ही पीछे भँवर में फंसते चले जाते है, एक शायर अपनी शायरी में भी उतनी मोहब्बत नहीं घोलता होगा जितना हम अपने अतीत से जी कर आज में आये होते है, चुपचाप सारी जिंदगी दिखावे के तौर पर गुजार देना इस बात की तस्दीक नहीं करता कि आपने एक बेहतरीन जिंदगी जी है…
हम जितना आगे की ओर बढ़ते है उतना ही पीछे भँवर में फंसते चले जाते है, एक शायर अपन…

हम जितना आगे की ओर बढ़ते है उतना ही पीछे भँवर में फंसते चले जाते है, एक शायर अपनी शायरी में भी उतनी मोहब्बत नहीं घोलता होगा जितना हम अपने अतीत से जी कर आज में आये होते है, चुपचाप सारी जिंदगी दिखावे के तौर पर गुजार देना इस बात की तस्दीक नहीं करता कि आपने एक बेहतरीन जिंदगी जी है…
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Twitter shayarish by क़ाफ़िया