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हाथ अपने उठाकर मैं क्या मांगता
जब से तुझसे मोहब्बत …

सोचता हूँ अगर मैं दुआ मांगता हाथ अपने उठाकर मैं क्या मांगता जब से तुझसे मोहब्बत …

सोचता हूँ अगर मैं दुआ मांगता
हाथ अपने उठाकर मैं क्या मांगता
जब से तुझसे मोहब्बत मैं करने लगा
तब से जैसे, इबादत मैं करने लगा..
मैं काफिर तो नहीं..मगर ऐ हसीं,
जब से देखा मैंने तुझको,
मुझको बंदगी आ गयी..
मैं शायर तो नहीं..
मगर ऐ हसीं, जब से देखा..मैंने तुझको,
मुझको शायरी आ गयी…
🥰 https://t.co/I4r1QEpPSL
सोचता हूँ अगर मैं दुआ मांगता
हाथ अपने उठाकर मैं क्या मांगता
जब से तुझसे मोहब्बत …

सोचता हूँ अगर मैं दुआ मांगता
हाथ अपने उठाकर मैं क्या मांगता
जब से तुझसे मोहब्बत मैं करने लगा
तब से जैसे, इबादत मैं करने लगा..
मैं काफिर तो नहीं..मगर ऐ हसीं,
जब से देखा मैंने तुझको,
मुझको बंदगी आ गयी..
मैं शायर तो नहीं..
मगर ऐ हसीं, जब से देखा..मैंने तुझको,
मुझको शायरी आ गयी…
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