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वो उँगलियों पे से मिरे छल्ले उतारने को सो…
-मोहब्बत-को-जब-तलब-करने-को-पहुँची-वो-उँगलियों

वफ़ा मोहब्बत को जब तलब करने को पहुँची, वो उँगलियों पे से मिरे छल्ले उतारने को सो…

वफ़ा मोहब्बत को जब तलब करने को पहुँची,
वो उँगलियों पे से मिरे छल्ले उतारने को सोची.

अजय अरुण

#बज़्म #शायरंश #शायरी #हिंदी_शब्द #काव्य_कृति #काव्यांश #लेखनी #शायर https://t.co/tbbui37wTh
वफ़ा मोहब्बत को जब तलब करने को पहुँची,
वो उँगलियों पे से मिरे छल्ले उतारने को सो…

वफ़ा मोहब्बत को जब तलब करने को पहुँची,
वो उँगलियों पे से मिरे छल्ले उतारने को सोची.

अजय अरुण

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Twitter shayarish by Ajay Arun

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