लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं रुह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते है…

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लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं
रुह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते हैं

– साहिर लुधियानवी
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Source by सुनील पंवार ✍️

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