लोगों को ना जाने क्यूं हमसे अदावतें है बेरुखी है। खैर एक शायरी तो है,जो अपनी पक…

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लोगों को ना जाने क्यूं हमसे अदावतें है बेरुखी है।

खैर एक शायरी तो है,जो अपनी पक्की सखी है।। सुप्रभातम
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Source by Dhruv Narayan Singh

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