लव √¡हाद में फसे लड़कियों से मुझे कोई सहानुभूति नही ! दिन भर पर नाच गाना देखने क…

लव √¡हाद में फसे लड़कियों से मुझे कोई सहानुभूति नही ! दिन भर पर नाच गाना देखने का वक़्त होता है लेकिन ये आज तक लव √¡हाद की खबरे नही पढ़ पाती ?
शेरो शायरी, झूठी तारीफ के 2 कसीदे में बुलबुल की तरह उड़ने वाली को बात समझ मे तब आती है जब तबाह हो जाती है
खुद को रूढ़िवादी समझती है !!
लव √¡हाद में फसे लड़कियों से मुझे कोई सहानुभूति नही ! दिन भर पर नाच गाना देखने क…

लव √¡हाद में फसे लड़कियों से मुझे कोई सहानुभूति नही ! दिन भर पर नाच गाना देखने का वक़्त होता है लेकिन ये आज तक लव √¡हाद की खबरे नही पढ़ पाती ?
शेरो शायरी, झूठी तारीफ के 2 कसीदे में बुलबुल की तरह उड़ने वाली को बात समझ मे तब आती है जब तबाह हो जाती है
खुद को रूढ़िवादी समझती है !!
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Twitter shayarish by ഭാരത് കുമാർ

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