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कभी तन्हाई में,,,
रफ्ता – रफ्ता तुझे आँखों से न…
-जो-हम-रोते-हैं-छुपकर-छुपकर-कभी-तन्हाई-में-रफ्ता

यह जो हम रोते हैं छुपकर-छुपकर,,, कभी तन्हाई में,,, रफ्ता – रफ्ता तुझे आँखों से न…

यह जो हम रोते हैं छुपकर-छुपकर,,,
कभी तन्हाई में,,,
रफ्ता – रफ्ता तुझे आँखों से निकाल आते हैं,,,
हम मोहब्बत पे भी एहसान कोई रखते नहीं,,,
नेकियां करते हैं,,,
दरियाओ में डाल आते हैं!!!!
#शायरी
#हसरतें https://t.co/pAdJefcsdt
यह जो हम रोते हैं छुपकर-छुपकर,,,
कभी तन्हाई में,,,
रफ्ता – रफ्ता तुझे आँखों से न…

यह जो हम रोते हैं छुपकर-छुपकर,,,
कभी तन्हाई में,,,
रफ्ता – रफ्ता तुझे आँखों से निकाल आते हैं,,,
हम मोहब्बत पे भी एहसान कोई रखते नहीं,,,
नेकियां करते हैं,,,
दरियाओ में डाल आते हैं!!!!
#शायरी
#हसरतें https://t.co/pAdJefcsdt
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