मोहब्बत शायरी: मैं वाकिफ़ हूँ चार दिन की मोहब्बत से, मैं भी रह चुका हूँ अज़ीज़ …

मोहब्बत शायरी:
मैं वाकिफ़ हूँ चार दिन की मोहब्बत से,

मैं भी रह चुका हूँ अज़ीज़ किसी का…!!!

मोहब्बत को भी भूख होती है इज्ज़त की,
इज्ज़त ना मिले तो मोहब्बत मर जाती है..!!
#aashurj31
मोहब्बत शायरी:
मैं वाकिफ़ हूँ चार दिन की मोहब्बत से,

मैं भी रह चुका हूँ अज़ीज़ …

मोहब्बत शायरी:
मैं वाकिफ़ हूँ चार दिन की मोहब्बत से,

मैं भी रह चुका हूँ अज़ीज़ किसी का…!!!

मोहब्बत को भी भूख होती है इज्ज़त की,
इज्ज़त ना मिले तो मोहब्बत मर जाती है..!!
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Twitter shayarish by Aashish Gautam

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